हमें एक ऐसा समाज चाहिए जिसमें कन्या भ्रूण हत्या न हो, एक भी बच्चा अशिक्षित न रहे
हमें एक ऐसा समाज चाहिए जिसमें कन्या भ्रूण हत्या न हो, एक भी बच्चा अशिक्षित न रहे ।
नासनं सिद्धसदृशं न कुम्भसदृशं बलम्। न खेचरीसमा मुद्रा न नादसदृशो लयः।। सिद्धासन के समान कोई आसन नहीं , कुम्भक के समान कोई बल नहीं , खेचरी के समान कोई मुद्रा नहीं और नाद के समान कोई लय नहीं ।
हमें एक ऐसा समाज चाहिए जिसमें कन्या भ्रूण हत्या न हो, एक भी बच्चा अशिक्षित न रहे ।
चलो, अब कुछ संकर जाति के लोगो ने यह कहना शुरु कर दिया है कि राम नहीं हैं, अगर राम नहीं हैं, जिनके अस्तित्व के सबसे ज्यादा प्रमाण हैं तो फिर अन्य देवी देवता और अवतार कभी भारत में हुए ही नहीं और हिन्दु धर्म का कोइ अस्तित्व ही नहीं । तो हिन्दुओ, अपना टाट कमडंल उठाओ और इस इन्डिया छोड़ भाग क्योंकि अब भारत और हिन्दूस्तान का कोई अस्तित्व नहीं है । और अगर तुम्हे ये बातें बुरी लग रही तो उठो, जागो और इस देश को हिन्दु राष्टर् घौषित करो ।
नमामिशमीशान निर्वाण रूपं।
Labels: शिव स्तुति
यो गुरुः स शिवः प्रोक्तो यः शिवः स गुरुः स्मृतः।
He epitomises true knowledge, all the sciences and total divinity. He is the Supreme Soul. Music has emanated from his voice. And it is He who incarnates in the form of Ram and Krishna. The name of Swami Sachchidanand is the greatest Mantra and a symbol of Totality.
It is necessary for a new initiate in the world of Sadhanas not to be frustrated or lose hope by the initial failures. This is a wonderful article for the new Sadhaks which they shall find really heartening and encouraging.